Faasle Mitaane Ko Is Kadar Tadapte Hain
Faasle Mitaane Ko Is Kadar Tadapte Hain
Hum Idhar Tadapte Hain, Wo Udhar Tadapte Hain
Dhadakte Main Magar Shor Nahi Karte !
Dono Ke Dil Aur Jigar Tadapte Hain
Khuda Hota Hai Sabr Karne Waalo'n Ke Saath!
So Ham Bhi Rakh Kar Sabar Tadapte Hain
Chain Hamko Bhi "Aashiq” Kahaa'n Milta Hai!
Jab Wahaa'n Hamare Dilbar Tadapte Hain
© Aashiq Banarasi
इक लम्हा भी इश्क़ का ना ज़ाया कीजिए
इक लम्हा भी इश्क़ का ना ज़ाया कीजिए
महबूब से अपने ख़फ़ा ना रहा कीजिए
उनका मिजाज़ बदलते वक़्त नहीं लगता!
वक़्त हो या ना हो, वक़्त उनको दिया कीजिए ।
ऱफ़ीक़-ए-क़ल्ब की हर ख़्वाहिश हो पूरी!
मुफ़लिसी में भी ये कोशिश किया कीजिए ।
नख़रे उठाने की गर ज़हमत ना हो सके!
गुज़ारिश है कि आशिक़ी मत किया कीजिए ।
तूफ़ान से ज़्यादा उफ़ान उठते हैं इश्क़ में!
दिल पे रख कर पत्थर इश्क़ किया कीजिए ।
मुहब्बत की जड़ें “आशिक़” मज़बूत रखो!
बुज़दिल से ना इश्क़ किया कीजिए ।
© आशिक़ बनारसी
करने जब उनकी तरफ़ नज़र आते हैं
करने जब उनकी तरफ़ नज़र आते हैं
हर नज़र से वोह अलग नज़र आते हैं
उनकी ज़ुल्फ़ों से कुछ यूं होती हैं बारिशें!
भीगे-भीगे सभी मंज़र नज़र आते हैं ।
निगाहों से नज़र-ए-इनायत जब हैं वोह करते!
कसम से मुझे दो खंजर नज़र आते हैं ।
सुर्ख़-रु रहते, हैं हर पल चमकते!
आरिज़ उनके इस तरह नज़र आते हैं ।
पंखुड़ियों जैसे हैं रहते भीगे!
लबों पे आब-ए-ज़र नज़र आते हैं ।
क्या लिखे “आशिक़” अब इसके आगे!
चांदनी में वोह रश्क़-ए-क़मर नज़र आते हैं ।
© आशिक़ बनारसी